“जौन एलिया और समकालीन सोच की 11 बेहतरीन शायरी: मोहब्बत, तन्हाई और ज़िंदगी पर”

1 –
अपने सब यार काम कर रहे हैं,
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं।

2 –
अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं,
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या।

3 –
काम की बात मैंने की ही नहीं,
ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं।

4 –
कौन से शौक़, किस हवस का नहीं,
दिल मेरी जान तेरे बस का नहीं।

5 –
ख़र्च चलेगा अब मेरा किस के हिसाब में भला,
सब के लिए बहुत हूँ मैं अपने लिए ज़रा नहीं।

6 –
जमा हम ने किया है ग़म दिल में,
इस का अब सूद खाए जाएँगे।

7 –
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को,
अपने अंदाज़ से गँवाने का।

8 –
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी,
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में।

9 –
जो गुज़ारी न जा सकी हम से,
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है।

10 –
‘जौन’ दुनिया की चाकरी कर के
तूने दिल की वो नौकरी क्या की।

11 –
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम,
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम।

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