साहित्य की दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने शब्दों से समाज को नई दिशा देते हैं और अपनी रचनाओं से पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं। प्रख्यात कवि ” श्री गोविंद गजब जी ” उन्हीं महान साहित्यिक हस्तियों में से एक हैं, जिनकी लेखनी केवल कविताओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हृदय और आत्मा को भी छू जाती है।
गोविंद गजब जी की कविता में जहाँ एक ओर जीवन के गहरे अनुभव झलकते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज की सच्चाई और सकारात्मक दृष्टिकोण का अद्भुत संगम मिलता है। वे उन कवियों में से हैं, जिनके शब्द सिर्फ पढ़े नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं। उनकी रचनाओं ने हमेशा हमें यह सिखाया है कि कठिनाइयों के अंधेरों में भी आशा की एक किरण होती है और सच्चा कवि वही है जो उस किरण को अपनी लेखनी से सब तक पहुँचा दे।
लेखनशाला संस्था, साहित्यिक धरोहर के प्रति अपनी निष्ठा के साथ, श्री गोविंद गजब जी के साहित्यिक योगदान को हृदय से प्रणाम करती है। उनका जीवन और उनकी रचनाएँ हम सबके लिए मार्गदर्शक हैं—जो हमें न सिर्फ लिखने की प्रेरणा देती हैं, बल्कि जीने का सच्चा अर्थ भी सिखाती हैं।
आज के इस साहित्यिक दौर में, जहाँ शब्द कभी-कभी खोखले लगते हैं, वहाँ गोविंद गजब जी जैसे कवि अपने सशक्त और सार्थक लेखन से यह साबित करते हैं कि कविता केवल भावनाओं का खेल नहीं, बल्कि समाज को संवारने और हृदयों को जोड़ने का माध्यम है।
चाहत मिली है, मान मिला, प्यार मिला है।
साँसे मिली हैं, उनसे ही संसार मिला है।
कैसे कहूँ पुरखों से हमें कुछ नहीं मिला,
जीवन मिला है,जीने का अधिकार मिला है।
– डॉ. गोविन्द ‘गजब’
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 1
डॉ. गोविन्द ‘गजब’ ( कवि )
उन्नाव