जीवन की भीड़-भाड़ में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनसे मिलकर लगता है कि सादगी ही सबसे बड़ी शान है और सहजता ही सबसे बड़ी ताकत। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं ” अशोक गुप्ता जी ” , ” अद्विक प्रकाशन ” के संस्थापक। उन्होंने न केवल साहित्य की सेवा की है, बल्कि अपने विनम्र स्वभाव और आत्मीय व्यवहार से हर दिल को छुआ है।
उनकी मुस्कान में अपनापन है, उनके शब्दों में संवेदनशीलता और उनके व्यवहार में सहजता का उजास। उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति यह अनुभव करता है कि सच्चा साहित्यकार या प्रकाशक वही है, जो केवल किताबों का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी प्रकाशन करता है। उनकी यही विशेषता अद्विक प्रकाशन को मात्र एक संस्था नहीं, बल्कि लेखकों और पाठकों के लिए परिवार का रूप देती है।
अशोक गुप्ता जी का विश्वास है कि हर लेखक की कलम समाज का आईना है और हर शब्द अपने भीतर एक नया उजाला समेटे हुए है। उनकी दृष्टि व्यवसायिक नहीं, बल्कि रचनात्मक और प्रेरणादायक है। वे हर लेखक को सम्मान देते हैं और हर रचना को एक नई पहचान। यही कारण है कि उनके साथ जुड़ने वाला हर व्यक्ति खुद को महत्वपूर्ण और प्रोत्साहित महसूस करता है।
उनका सहज व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि असली महानता उपलब्धियों से नहीं, बल्कि विनम्रता से आँकी जाती है। उनकी सरलता हमें यह विश्वास दिलाती है कि जीवन की सबसे बड़ी कमाई नाम या धन नहीं, बल्कि लोगों का स्नेह और विश्वास है।
अशोक गुप्ता जी वास्तव में उस दीपक की तरह हैं, जो स्वयं जलकर औरों के जीवन में रोशनी फैलाते हैं। उनकी सहजता और प्रेरणा ही उन्हें विशेष बनाती है और साहित्य जगत के लिए अमूल्य धरोहर।
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 4
अशोक गुप्ता ( संस्थापक – अद्विक प्रकाशन )
दिल्ली