अतीत या जो गया बीत
अतीत से युद्ध नहीं अतीत को सिद्ध करें
जरा झांक ले ,देख ले खुद को निर्विघ्न करें
जो किया तब किया
जैसे जिया तब जिया
तब की बुद्धिमत्ता से
जैसा मन में आया किया
उस समय के स्वयं का
क्यों अब चिंतन करें
यदि कुछ करना ही है
चलो जरा मनन करें
अतीत से युद्ध नहीं अतीत को सिद्ध करें
जरा झांक ले ,देख ले खुद को निर्विघ्न करें
बैठे हैं किनके शब्दों को लेकर
अपने इस छोटे से मन में
किनकी है आवाज़ गूंजती
इस निर्जन वन में
कहां तक चमक रही
बिजलियां इस घन में
मेरा मन ही है खड़ा
मेरे विपरीत इस रन में
जाग ज़रा ,जान पहचान इन्हें
मिले इनसे, बोध का जनन करे
समिधा आत्मप्रेम, की ले
स्वीकृत कर फिर हवन करें
अतीत से युद्ध नहीं अतीत को सिद्ध करें
जरा झांक ले ,देख ले खुद को निर्विघ्न करें.
ममता श्रीवास्तव , लखनऊ उत्तर प्रदेश।