भारत की वीरगाथा | यशांशी अवस्थी

भारत की वीरगाथा

विषमताओ को सौभाग्य में बदलना आता है मुझे,

भारत की बेटी हूँ मैं, आओ सुनाऊ, वीरगाथा तुम्हें।

सत्य ही कहा मेरा भारत महान है,

वीरता, शौर्य , त्याग, पराक्रम का ये अमर जहान है ।

 

संस्कृति का उत्थान वहां नारी का सम्मान जहां,

ऐसे वीर सपूतों की पुण्य जन्मभूमि और कहां!

ऐसे ही कई जवानों की, वीरगाथा मेरी जुबानी,

आज बताऊंगी, इतिहास के पन्नो पर छिपी उनकी कहानी।

 

पिंगली वेंकैया से शुरूआत, तिरंगा निर्माण के लिए याद करे, केसरिया, हरे, श्वेत रंग में 14 तीली का चक्र भी दर्शाया । केसरिया – बलिदान, हरा – खुशहाली तो श्वेत शांति का प्रतीक कहलाया। बात करे अब उसकी, जो चोटी 4875 भारत में लाया।

विक्रम बत्रा ने भारत को कारगिल में जीत दिलाया, जीते हमने युद्ध कई कारगिल भी जीता हमने। कारगिल ने छीन लिया, परमवीर चक्र विजेता एक परमवीर योद्धा हमसे, जवाहरलाल नेहरू ने आराम हराम है का नारा लगाया । जेल में भी आजाद हूँ मैं भगत सिंह ने दोहराया, लाल बहादुर शास्त्री ने जवान और किसान को महान बताया । जन्मसिद्ध अधिकार पाने की बाल गंगाधर तिलक की हठ थी, जो था स्वराज, वन्दे मातरम् बोले बंकिम चन्द्र चटर्जी रामप्रसाद बिस्मिल के दिल में सरफरोशी की तमन्ना आई वीरता की मिसाल, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई । कहते हैं कि

~ खून नहीं वो पानी है, जो देश के काम न आए, वो बेकार जवानी है।

~ जब मुगलों को हराकर परचम लहराया तभी तो बहादुर शिवाजी महाराज कहलाया।

~ चलो याद करें उनकी कुर्बानी, जिन्होने दिलाई भारत को आजादी।

– यशांशी अवस्थी

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