‎दिल के कमरे को गुलाबों से सजा रखा है | कलीम रज़ा

‎दिल के कमरे को गुलाबों से सजा रखा है,

‎तेरी यादों को कलेजे से लगा रखा है।

‎इसलिए चांद भी बादल में छुपा है जाकर,

‎तुमने चेहरे से जो पर्दे को हटा रखा है।

‎तेरे होटो पे जो ये तिल है उसी तिल की कसम,

‎ऐसा लगता है कि दरबान बिठा रखा है।

‎मुझसे टकरा के चली जाती है मुश्किल सारी,

‎मुझको मा तेरी दुवाओं ने बचा रखा है।

‎दूर है मुझसे तू अहसास नहीं है क्यो कि,

‎तेरी तस्वीर को कमरे में लगा रखा है

‎उससे नज़रे ही नहीं हटती है ए मेरे कलीम,

‎उसकी आखो ने तो दीवाना बना रखा है।

कलीम रज़ा 

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