गाँव हो गया शहर ओ भईया | देवा यादव

गाँव हो गया शहर ओ भईया,

गाँव हो गया शहर।

चला गया दातून का मौसम,

अब आ गया मंजन।

खट्टे मीठे बेर मिट गए,

जैसे गाँव में सज्जन।।

गाँव हो गया शहर ओ भईया,

गाँव हो गया शहर।

बचपन में लकड़ी की गाड़ी,

बन गया अब स्कूटर।

डाक पत्र की जगह आ गया ,

फेसबुक, वॉट्सएप, ट्वीटर।।

गाँव हो गया शहर ओ भईया,

गाँव हो गया शहर।

चाय की प्याली सूनी हो गई,

कॉफी के चक्कर में।

देसी छाछ टिक न पाई,

कोल्ड ड्रिंक के टक्कर में।।

गाँव हो गया शहर ओ भईया,

गाँव हो गया शहर।

– देवा यादव

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