गीत : कैसे कह दूं कि तुम याद आते नहीं
कैसे कह दूं कि तुम याद आते नहीं
मन के दर्पण में तुमको सजाते नहीं
जबसे तुमने कहा आँसुओ को है मोती
आँसुओ को व्यर्थ में हम बहाते नहीं
कैसे कह दूं….
मेरी इक आवाज पे तुम दौड़े चले आते थे
अब गला बैठ जाता आवाज देते देते
पर एक पल को भी तुम आते नहीं
आँसुओ को व्यर्थ में हम बहाते नहीं
कैसे कह दूं….
तेरा मेरा विरह इस तरह कुछ रहा
तुम राधा की तरह बृज छोड़ पाए नहीं
हम कृष्ण सा मथुरा छोड़ पाए नहीं
कैसे कह दूं….
कैसे कह दूं कि तुम याद आते नहीं
मन के दर्पण में तुमको सजाते नहीं
जबसे तुमने कहा आँसुओ को है मोती
आँसुओ को व्यर्थ में हम बहाते नहीं
कैसे कह दूं….
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