हर एक राह में कांटे होंगे, हर मोड़ पे अंधेरे होंगे।
चलना तुझे तब भी होगा,जब पाँव में छाले होंगे।
रुकना नहीं तुझे हार से, डरना नहीं तुझे वार से,
जो लक्ष्य तेरे दिल में है, वो छिपा नहीं संसार से।
पसीने की वो चंद बूंदें, बनती हैं तेरी जीत की सीढ़ियाँ,
जो गिर के फिर उठे हैं, उन्हीं से लिखी गईं हैं कहानियाँ।
सपनों को तू साकार कर, हर डर से तू इनकार कर,
सिर्फ़ सोचने से नहीं मिलेगा, हर रोज़ नया प्रयास कर।
मंज़िल उन्हीं को मिलती है, जो थक कर भी रुकते नहीं,
अंधेरे जितने भी गहरे हों, सूरज फिर भी कभी छिपते नहीं।
– सूरज सिंह
Very nice