22 अप्रैल की सुबह, जैसे धूप ही भूल गई हो चमकना, उस दिन मेरी दुनिया की सबसे कीमती रौशनी चली गई चुपचाप।
मेरे पुच्छ्र, मेरा रॉकी, मेरा बच्चा -तू गया नहीं, जैसे मेरा दिल ही थम गया हो एक पल में।
तेरे बिना ये घर -सिर्फ दीवारें हैं, कोनों में तेरी यादें हैं।
हर कोना बोल रहा है -“पुच्छू यहाँ बैठा था”, “यहाँ वो सोया था”, “यहाँ वो मुस्कराया था जब उसे ब्रेड की खुशबू आई थी।” तू तो सबका चहेता था-पर मेरा सब कुछ था, मेरा अपना सा। जो कुछ भी पसंद करता -पिज्ज़ा, ब्रेड, या चुपचाप सोफे पर सोना जब मम्मी सो जाती, और तू मासूम सी चाल से चुपके से लेट जाता।
याद है कैसे तू कभी कोई चीज़ बिना इज़ाज़त के छूता भी नहीं था?, तेरी वो आदतें, तेरी वो मासूमियत -जो अब सिर्फ आँखों में नमी बनकर रह गई हैं। नहाना तुझे पसंद नहीं था, और गुस्सा भी तेरा प्यारा सा था। बाथरूम में ले जाना मानो जंग जीतना हो हर बार, फिर कई दिन तक तू हमसे नाराज़ रहता था। अब वो रूठना भी कितना अच्छा लगता था। छत पर जाकर भौंकना, ठंडी की रातों में मेरे कमरे का दरवाज़ा खटखटाना – तेरी हर आदत, हर हरकत -अब बस सपनों की दुनिया में ही बसी है।
मैं ज़िंदा हूँ लेकिन जैसे सब कुछ रुक गया हो, जैसे तेरे साथ मैं भी कहीं चला गया हूँ। 23 अगस्त को तेरा जन्मदिन था, और रहेगा -मनाऊँगी, तेरे नाम की वो चीज़ लाऊँगी जो तुझे पसंद थी। लोग पागल कहें – कहें, पर मैं तेरे लिए जीऊँगी, तेरे लिए जियूँगी।
आज ये जन्मदिन का महीना मेरे लिए शोक का प्रतीक बन गया है। कभी नहीं मनाऊँगी अपना जन्मदिन क्योंकि तू नहीं है। पुच्छू, तू क्यों नहीं सोचा मुझ पर? तू क्यों चला गया मुझे अकेला छोड़कर?, मैं गुस्से में हूँ -लेकिन सपने में आना न! मैं तुझसे कुछ नहीं कहूँगी, सिर्फ गले लगा लूँगी। कभी-कभी लगता है अगर तुझे और थोड़ा प्यार, थोड़ा और ध्यान मिला होता तो शायद तू आज हमारे साथ होता। पर मुझे यकीन है -एक दिन फिर मिलेंगे, किसी और रूप में, किसी और जीवन में, और मैं पहचान लूँगी तुझे। तेरी आँखों से, तेरे स्पर्श से, क्योंकि तुझसे मिलकर ही सुकून आता है। तू मेरी जान था, है, और रहेगा। पुच्छ्र, तुम मेरे हो – हमेशा के लिए। और जब मैं कहती हूँ “I miss you”, तो वो सिर्फ शब्द नहीं होते वो मेरी साँसें होती हैं, जो अब तेरे नाम पर चलती हैं।
– आकृति मौर्य
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