चाँदनी रात,शरद की सौरभ महक,
धरती पर बिछी है चाँद की चादर।
किरणों में लिपटी हर एक बात,
प्रकृति का सौन्दर्य की है छत्तर।
नदियों बहती मीठी सुरभित धार,
चाँद की छवि में बसा है संसार।
शरद की पूर्णिमा का सिर्फ सार
छलके प्रेम का अद्भुत त्यौहार।
खुशियों की बौछार, मन में उमंग,
शरद की पूर्णिमा है मौसम की तरंग।
प्रकृति की गोद में सब कुछ है रंग।
शरद पूर्णिमा जीवन का एक अंग।
चाँदनी रात, सुनों कहानी पुरानी,
शरद पूर्णिमा आई, हरियाली छाई।
चाँद चमके जैसे सोने की थाली,
बिखरे रत्न झिलमिलाती उजियाली।
तारों की बारात जैसे चाँद की सहेली,
धरा पर बिखरे सपने मधुश्री के मेले।
कुमुदनी खिली हैं, जुगनू भी चमके,
प्रेम,उल्लास में इसकी रौनक चमके।
मिलकर मनाएं, इस पावन पर्व को,
शरद पूर्णिमा की रात प्रेम से भरपूर,
चांद की चाँदनी में, हम संग-संग रहें,
सुख-शांति और प्रेम से सब भरपूर ।
– डॉ. शरीफ़ ख़ान