सूबेदार पवन सिंह का जीवन केवल एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन और सेवा की अद्भुत गाथा है। भारतीय सेना में 30 वर्षों तक सेवा करते हुए उन्होंने सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र में हजारों सैनिकों को प्रशिक्षित किया। एनएसजी में अपनी सेवाएँ देने से लेकर कारगिल युद्ध के कठिन दिनों तक, जब वे कारगिल और द्रास सेक्टर में तैनात रहे, उनका जीवन सदैव देश के प्रति समर्पित रहा। यही नहीं, उन्होंने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के अंतर्गत डिप्टी बटालियन सिग्नल ऑफिसर के रूप में भारत का परचम विदेशों में भी लहराया।
सेना में रहते हुए ही पवन सिंह का मन अपने गाँव के गरीब बच्चों की दशा देखकर व्यथित हो उठता। वे अक्सर सोचते कि जिन परिवारों के पास न जमीन है, न साधन, उनके बच्चे मजदूरी करते-करते ही रह जाते हैं। दसवीं तक की पढ़ाई के बाद न तो उन्हें आगे का रास्ता पता होता, न सेना में भर्ती की सही जानकारी। इस दर्द ने उनके भीतर एक संकल्प जन्म दिया, कुछ ऐसा करने का, जिससे गाँव का हर प्रतिभाशाली बच्चा अपने सपनों को साकार कर सके।
सेवानिवृत्ति के बाद नवंबर 2016 से ही उन्होंने इस संकल्प को दिशा देना शुरू किया और 18 अक्टूबर 2018, दशहरा के दिन “जय हिंद युवा सेना संगठन” की नींव रखी। इस संगठन का उद्देश्य केवल और केवल निस्वार्थ सेवा है। यहाँ निःशुल्क फिजिकल प्रशिक्षण, निःशुल्क प्री-मेडिकल जाँच, निःशुल्क डॉक्यूमेंटेशन और काउंसिलिंग दी जाती है। अपनी ही जमीन और अपने ही संसाधनों से उन्होंने प्रशिक्षण केन्द्र खड़ा किया, जो आज उन युवाओं का पथप्रदर्शक बन चुका है, जिन्हें सेना, एयरफोर्स, पुलिस, बीएसएफ या सीआरपीएफ में भर्ती होना है।
आज नतीजा सबके सामने है। सैकड़ों युवाओं ने फिजिकल पास किया है और कई ने फाइनल सफलता भी पाई है। बीते वर्ष 13 लड़के अग्निवीर में, 8 लड़कियाँ उत्तर प्रदेश पुलिस में, 5 लड़के उत्तर प्रदेश पुलिस में तथा 1 युवक बीएसएफ में चयनित हुआ। कुछ ने ट्रेनिंग पूरी कर ली है और कुछ अभी कर रहे हैं। इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि सूबेदार पवन सिंह ने अब तक किसी भी बच्चे से एक पैसा तक नहीं लिया। उन्होंने अपनी जमीन, धन और समय ही नहीं, बल्कि अपना पूरा जीवन इस कार्य को समर्पित कर दिया।
ऐसे व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं। सूबेदार पवन सिंह ने साबित किया है कि सच्ची सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि समाज के बच्चों को सही रास्ता दिखाकर भी की जा सकती है। लेखनशाला संस्था ऐसे महान कर्मयोगियों को नमन करती है और मानती है कि उनकी यह कहानी हर रचनाकार और हर पाठक के लिए प्रेरणा का दीपक है।
लेखनशाला अभिव्यक्ति -14
सूबेदार पवन सिंह
रायबरेली, लालगंज