समाज में एक ऐसा व्यक्तित्व जिनकी सरलता और सहजता हर दिल को छू लेती है – स्वयं श्रीवास्तव जी।
श्रीवास्तव जी के स्वभाव की सबसे बड़ी विशेषता है उनकी विनम्रता और सहज संवाद शैली। वे अपने विचारों और पंक्तियों को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि समाज का हर वर्ग उन्हें सरलता से समझ सके और उनसे जुड़ सके। उनकी लेखनी में न केवल शब्द होते हैं, बल्कि जीवन की गहराई और सामाजिक चेतना का स्पष्ट आभास भी मिलता है।
समाज में ऐसे विचार कभी-कभी जन्म लेते हैं, जो शब्दों से कहीं गहरे उतरकर जीवन को दिशा दे जाते हैं। ये विचार हमें यह सिखाते हैं कि सरलता ही सबसे बड़ी ताक़त है, और सहजता ही वह सेतु है जो इंसान को इंसान से जोड़ती है।
इन्हीं विचारों की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले हमारे बीच एक ऐसा व्यक्तित्व है, जो मानते हैं कि शब्द केवल पढ़े जाने के लिए नहीं, बल्कि जिए जाने के लिए होते हैं। उनकी पंक्तियाँ कठिनाइयों में सहारा देती हैं, और उनके विचार हमें बताते हैं कि बदलाव का मार्ग बड़े उपदेशों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संवेदनशील कर्मों से निकलता है।
लेखनशाला की दृष्टि में, यह सोच समाज के लिए एक प्रेरणा है। यहाँ यह विश्वास गहराता है कि सच्ची महानता स्वयं को ऊँचा दिखाने में नहीं, बल्कि दूसरों को ऊपर उठाने में है। उनके विचार हमें यह समझाते हैं कि साहित्य तभी सार्थक है, जब वह लोगों की ज़िंदगी में रोशनी और अपनापन भर सके।
हम गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि ऐसे मार्गदर्शक हमारे समाज और साहित्य दोनों के लिए दीपक हैं। उनके विचार, उनकी सहजता और उनकी लेखनी पीढ़ियों तक वह ऊर्जा देती रहेगी, जो इंसान को इंसानियत से जोड़ती है। लेखनशाला सदैव उनके इस योगदान से प्रेरणा लेती रहेगी।
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 8
स्वयं श्रीवास्तव
उन्नाव, उत्तर प्रदेश