तेरे बगैर
कुछ भी नहीं हैं जचता, मुझको तेरे बगैर।
मंज़िल न कोई रास्ता, जचता तेरे बगैर ।।
हासिल हैं मुझको, सोहरते दौलत तेरे बगैर ।
फिर नहीं हैं लगता, कुछ अच्छा तेरे बगैर।।
कंगन किसी के तूने, पहने और चल दिए।
बोलो कैसे बनूँगा मैं, दूल्हा तेरे बगैर ।।
तुझको पसंद हैं बारिश, आयी हैं ज़ोर से ।
क्या करूंगा मैं, ऐसी बारिश का तेरे बगैर।।
खुश हैं जो संग किसी के, तू तो खुश रह ।
खुश रह लेगा, ये ‘विमल’ भी अब तेरे बगैर ।।
विमल कुमार ‘बेबी’
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