मेरी कहानी
चलो आज अपनी कहानी का एक पन्ना खोलता हूँ,
अपने दिल के कुछ अनकहे जज़्बात बोलता हूँ।
कैसा हूँ मैं, क्या हूँ मैं ? ये तुम्हें बताता हूँ,
अपनी खामोशियों का हर राज़ सुनाता हूँ।
मैं थोड़ा भावुक हूँ, छोटी बातों में खो जाता हूँ,
हर एहसास को दिल की गहराइयों में बसाता हूँ।
गुस्सा भी कभी-कभी मुझे जल्दी आ जाता है,
मगर अपनों के लिए तो मैं खुद को भी भुल जाता हूँ।
कभी – कभी दिल चाहता है, कोई मेरी चुप्पी पढ़ ले,
मेरे अधूरे लफ़्ज़ों का भी मतलब समझ ले।
पर अफ़सोस, मेरे एहसास अक्सर अनसुने रह जाते हैं,
और मेरे दर्द मेरी मुस्कानों में कहीं छिप जाते हैं।
हर चेहरे को अपना समझने की भूल कर बैठता हूँ,
हर रिश्ते में सच्चाई का दीप जला बैठता हूँ।
मगर लोग अक्सर मुझे अपना नहीं मानते,
बस अपनी ज़रूरतों तक ही मेरा साथ पहचानते।
मैं रिश्तों में कभी हिसाब-किताब नहीं रखता,
किसने क्या दिया, इसका जवाब नहीं रखता।
फिर भी जाने क्यों हर बार ऐसा होता है,
मेरे हिस्से में ही अधूरापन आकर रोता है।
चालाकियों की दुनिया मुझे कभी रास नहीं आई,
झूठी मुस्कानों की कला भी मैंने सीख न पाई।
हाँ, लोगों की नीयत को मैं आँखों से पढ़ लेता हूँ,
इसलिए हर धोखे को अब चुपचाप सह लेता हूँ।
अगर कोई मेरे दिल को कभी तोड़ भी जाए,
मेरे भरोसे को वो कहीं छोड़ भी जाए।
तो शिकायतों का शोर नहीं मचाता हूँ,
बस उसे दिल से और फिर ज़िंदगी से हटा देता हूँ।
यही हूँ मैं, थोड़ा टूटा, मगर अब भी खड़ा हूँ,
थोड़ा बिखरा, मगर अपने सच पर अड़ा हूँ।
दिल से सच्चा, एहसासों से भरा हुआ इंसान हूँ,
और शायद… ज़रा ज़्यादा ही भावुक इंसान हूँ।
— धीरज सिंह चौहान