अनुभव कई अनूठे देकर कविता – किशनू झा

नववर्ष

अनुभव कई अनूठे देकर,
कुछ पूरे कुछ टूटे देकर।
कुछ पूरा कुछ रहा अधूरा,
संयम की मुस्कानें देकर।
नये वर्ष का परिचय देकर,
वही पुराना हाल दे गया।
साहस ,पीड़ा ,आशा मन में,
जाता हुआ साल दे गया।

कुछ शक्लों की सच्चाई दी
नये रिश्तों की अंगड़ाई दी।
कुछ घाटे का सौदा देकर,
कुछ कामों में भरपाई दी।
कुछ प्रश्नों के उत्तर देकर,
मन में कई सवाल दे गया।
साहस ,पीड़ा ,आशा मन में,
जाता हुआ साल दे गया।

ठोकर देकर सीख सिखाकर,
नये नये अध्याय पढ़ाकर।
प्रश्नों की गुत्थी सुलझाकर,
उम्मीदों का जाल दे गया।
साहस ,पीड़ा ,आशा मन में,
जाता हुआ साल दे गया।
साहस ,पीड़ा ,आशा मन में,
जाता हुआ साल दे गया।

– किशनू झा

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