1-
मेरी हथेली पर धूप का एक टुकड़ा गिरा,
और कह गया कि
उजाला हमेशा आसमान से नहीं,
कभी-कभी मन से भी आता है।
– डॉ. रीना कुमारी
2-
तेज़ कदमों की भीड़ में,
एक पल को ठहरकर देखो,
ज़िंदगी हवा की तरह है।
दिखती कम है, महसूस ज़्यादा होती है।
– डॉ. रीना कुमारी
1-
मेरी हथेली पर धूप का एक टुकड़ा गिरा,
और कह गया कि
उजाला हमेशा आसमान से नहीं,
कभी-कभी मन से भी आता है।
– डॉ. रीना कुमारी
2-
तेज़ कदमों की भीड़ में,
एक पल को ठहरकर देखो,
ज़िंदगी हवा की तरह है।
दिखती कम है, महसूस ज़्यादा होती है।
– डॉ. रीना कुमारी