1 –
मुझ को मारा है हर इक दर्द ओ दवा से पहले,
दी सज़ा इश्क़ ने हर जुर्म-ओ-ख़ता से पहले।
2 –
और भी दुःख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।
– फ़ैज़ अहमद फैज
3 –
जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा,
किसी चराग का अपना मकाँ नहीं होता।
– वसीम बरेलवी
4 –
जिंदगी जिंदा – दिली का है नाम,
मुर्दा – दिल खाक किया करते हैं।
– इमाम बख्श नासिख़
5-
चुपके – चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है,
हमको अब तक आशिकी का वो जमाना याद है।
– हसरत मोहानी
6 –
मैं अकेला ही चला था जानिब – ए – मंजिल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।
– मजरूह सुल्तानपुरी
7 –
होश वालों को ख़बर क्या बे – खुदी क्या चीज है,
इश्क कीजे फ़िर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है।
– निदा फ़ाजली
8 –
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी,
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में।
9 –
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले,
खुदा बंदे से पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है।
– अल्लामा इक़बाल
10 –
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,
वर्ना हम भी आदमी थे काम के।
– मिर्ज़ा ग़ालिब
11 –
उसकी याद आई है सांसों जरा आहिस्ता चलो,
धड़कनों से भी इबादत में खनन पड़ता है।
– राहत इंदौरी
12 –
कर रहा था ग़म – ए – जहां का हिसाब,
आज तुम याद बेहिसाब आए।
– फ़ैज़ अहमद फैज
13 –
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल,
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।
– अहमद फ़राज़
14 –
तुम मुखातिब भी हो करीब भी हो,
तुमको देखें कि तुमसे बात करें।
– फ़िराक गोरखपुरी
15 –
बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फांसला रखना,
जहां दरिया समंदर से मिला, दरिया नहीं रहता।
– बशीर बद्र
16 –
इन्हीं पत्थरों पर चलकर अगर आ सको तो आओ,
मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशां नहीं है।
– मुस्तफा ज़ैदी
17 –
ये इश्क़ नही आसां बस इतना समझ लीजे,
इक आग का दरिया है और डूब के जान है।
– जिगर मुरादाबादी
18 –
कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता,
कहीं ज़मीन, कहीं आसमां नहीं मिलता।
– निदा फ़ाजली
19 –
नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती,
मगर जब याद आती है तो अक्सर याद आती है।
– हसरत मोहानी
20 –
हमें भी नींद आ जाएगी, हम भी सो जाएंगे,
अभी कुछ बेकरारी है सितारों तुम तो सो जाओ।
– क़तील शिफाई
21 –
मैं किताबों पर, दोस्तों पर पैसे खर्च करता हूं,
पत्थर और ईंटों पर खर्च करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं।
– रस्किन बांड