1 –
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई,
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ..!
2 –
मुद्दतों बाद इक शख़्स से मिलने के लिए,
आइना देखा गया, बाल सँवारे गए..!!
3 –
मर गए ख़्वाब सबकी आंखों के,
हर तरफ है गिला हकीक़त का।
4 –
चारसाजों की चारासाजी से
दर्द बदनाम तो नहीं होगा,
हाँ, दवा दो, मगर ये बतला दो
मुझ को आराम तो नहीं होगा।
5 –
और तो क्या था बेचने के लिए,
अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं।
6 –
अपना ख़ाका लगता हूँ,
एक तमाशा लगता हूँ !
अब मैं कोई शख़्स नहीं,
उस का साया लगता हूँ !
7 –
लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।
8 –
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम,
अब भी तुम मुझको जानती हो क्या..!!
9 –
ख़र्च चलेगा अब मेरा किस के हिसाब में भला,
सब के लिए बहुत हूँ मैं अपने लिए ज़रा नहीं।
10 –
मुझे अब तुम से डर लगने लगा है,
तुम्हें मुझ से मोहब्बत हो गई क्या..!
11 –
नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी,
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम।