हां मैं नारी हूं हिन्दी कविता – शिवांगनी त्रिपाठी

हाँ मै नारी हूं

मैं नीर हूं मैं निर्मल हूं मैं वसुधा कि धारा हूं,
हाँ मैं नारी हूं।

मैं शुभ हूं मैं अशुभ हूं मैं जीवन कि जननी हूं,
हाँ मैं नारी हूं

मैं दिन हूं मैं रात हूं मैं अन्धकार कि उजाला हूं,
हाँ मैं नारी हूं।

मैं पुष्प हूं कली भी मैं हूं,और
मैं फूलो कि माला हूं,
हां मैं नारी हूं।

मैं सूर्य हूं मैं तेज हूं मैं आकाश गंगा कि तारा हूं,
हाँ मैं नारी हूं।

मैं वैकुण्ठ मैं निवास करने वाले श्री हरि कि लक्ष्मी हूं,
हा मैं नारी हूं।

– शिवांगिनी त्रिपाठी
(गोरखपुर- उत्तर प्रदेश )

 

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