हद्द है यार, हिंदी कविता – अनुराधा ओस

हद्द है यार!!
धरती को अपने लहू की आंच से
जीवित करने वाली औरतें
कहां चली जाएं??

एक नेता का कहना है कि
तुम महिला हो
तुम्हें कुछ नहीं पता,

एक कह रहा है,
तुम प्रेम करोगी तो
मुंह पर कालिख पोत
कर जूते की माला पहनाएंगे,

और तो और हद्द है
जंगल में ले जा कर बांध दिया,
चालीस दिनों तक भूखे
हद्द है यार,
कैसे कोई जिएगा??

– अनुराधा ओस 

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