एक ही जान थी वो भी तुम्हें सौंप आए || शायरी

तेरे शहर से बहुत दूर जाने के बाद ये एहसास हुआ,
हम तो अपना दिल तुम्हारे शहर में ही भूल आए,
मेरे पास नहीं है कुछ देने को तुम्हारे लिए,
बस एक ही जान थी वो भी तुम्हें सौंप आए।।

– आकांक्षा प्रजापति

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