1 –
थोड़ा महंगा पड़ा औरों के,,
लिए जिंदगी जीना..
उम्र खर्च भी हुई और,,
कुछ हाथ भी नहीं लगा ..!!
2 –
साज़िश-ए-शहर में
मुजरिम के सिवा कोई नहीं,
आजकल वही ख़तरे में है
जिसका गुनाह कोई नहीं।
1 –
थोड़ा महंगा पड़ा औरों के,,
लिए जिंदगी जीना..
उम्र खर्च भी हुई और,,
कुछ हाथ भी नहीं लगा ..!!
2 –
साज़िश-ए-शहर में
मुजरिम के सिवा कोई नहीं,
आजकल वही ख़तरे में है
जिसका गुनाह कोई नहीं।