तुम केवल कल के सपने नहीं,
भारत का उज्ज्वल भविष्य हो।
तुम्हारे साहस, श्रम और ज्ञान से,
राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हो।
कठिनाइयों से मत घबराना,
संघर्षों से नाता जोड़ो।
हर असफलता से सीख लेकर,
सफलता की ओर कदम मोड़ो।
समय तुम्हारी सबसे बड़ी पूँजी,
इसे व्यर्थ कभी मत खोना।
अनुशासन को जीवन बनाकर,
अपने कर्मों से जग को संजोना।
पुस्तकों से केवल शब्द न लेना,
उनमें छिपे विचार अपनाना।
ज्ञान तभी सार्थक कहलाए,
जब उससे मानवता को सजाना।
ईर्ष्या, भय और आलस्य छोड़ो,
आत्मविश्वास को साथी बनाओ।
अपने भीतर की प्रतिभा को,
मेहनत से हर दिन चमकाओ।
शिखर उन्हीं के चरण चूमता है,
जो गिरकर भी फिर उठते हैं।
इतिहास उन्हीं के नाम लिखे जाते,
जो अपने कर्मों से जग गढ़ते हैं।
आओ ऐसा जीवन जिएँ कि,
माता-पिता का मान बढ़े।
गुरुओं का विश्वास अमर रहे,
और भारत का सम्मान बढ़े।
– प्रज्ञा