इक दीपक – विमल कुमार ‘बेबी’ की प्रेरणादायक कविता

 

इक दीपक

तुम इक दीपक जला लेना।
हाँ तुम इक दीपक जला लेना।।

जहाँ अँधेरा हो घना,
अविश्वास घनेरा हो,
वहाँ दीपक जला लेना।

तुम इक दीपक जला लेना।
हाँ तुम इक दीपक जला लेना।।

सफाई तन बदन की कर चुके,
सफाई घर की भी कर चुके ,
अब सफाई मन की करके,
वहाँ दीपक जला लेना।

तुम इक दीपक जला लेना।
हाँ तुम इक दीपक जला लेना।।

राम जी घर लौट आये थे आज के दिन,
तुमसे भी अगर कोई रूठा हो तो,
उसे घर वापस बुला लेना,
साथ में दीपक जला लेना।

तुम इक दीपक जला लेना।
हाँ तुम इक दीपक जला लेना।।

मिठाइयां खा भी ली और खिला भी दी,
बधाई दे भी दी और पा भी ली,
इक बार अपने बच्चों को,
थोड़ा सा वक़्त निकल के,
श्रीराम की गाथा सुना देना ।

तुम इक दीपक जला लेना।
हाँ तुम इक दीपक जला लेना।।

विमल कुमार ‘बेबी’
बाँगरमऊ, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted