कर्मवीर जमशेद जी टाटा को समर्पित | मेरे प्रियतम | डॉ० रीना कुमारी

1.
कर्मवीर जमशेद जी टाटा को समर्पित

हे टाटा तुम हो कर्मवीर।
पैदाईश हो तुम उस युग की, जब साँसे भी उन्मुक्त न थी,
जब जुल्मों-सितम के साये में थी सिसक रही माँ भारती;
जब पराधीन थे आर्य यहाँ, जंजीर गुलामी,
की कड़ी तुम आए लेकर दिव्य दृष्टि, हे टाटा तुम हो कर्मवीर ।

दृढ़ निश्चय तेरा अटल हुआ, राष्ट्र को समृद्ध बनाने का,
संघर्ष किया तुमने हटकर, थे ध्यान में केन्द्रित तीन लक्ष्य,
तीनों को भेद दिया तूने, अपनी दूरदर्शिता से
तुम स्वर्ग उतारे धरती पर तब धन्य हुई माँ भारती
हे टाटा तुम हो कर्मवीर।

अपने कर्त्तव्यों के बल पर तुम अमर हुए इस धरती पर,
पदचिन्ह मेरे अब पूज्य हुए, अनुचर उतारे आरती ।
शत नमन तुझे सब परिजन का,जिनके तुम भाग्य विधाता हो, हे कर्मवीर तुम तो, औद्योगिक भारत के निर्माता हो,
हे टाटा तुम हो कर्मवीर।

2.
मेरे प्रियतम

मेरे प्रियतम,
मेरे जीवन के सहयोगी,
तेरे बिना जीवन अधूरी है, मेरे लिए।
तेरे प्यार में तेरे सहयोग में।

मैं जीवन की हर मुसीबत का सामना करती हूँ,
तेरे साथ बिताए हर पल,
मेरे जीवन की सबसे सुन्दर यादें है।
तेरे प्यार की गर्मी में,
मेरे जीवन की हर ठंडक दूर हो जाती है।

तेरे लिए मेरे दिल में प्यार,
हर दिन बढ़ता है, हर दिन गहरा होता है।
तेरे साथ जीवन की हर मुसीबत का,
मैं सामना करती हूँ, बिना किसी डर के।
मेरे प्रियतम, मेरे जीवन के सहयोगी,
मैं तेरे साथ जीवन की हर खुशी को मानती हूं।
तेरे प्यार में, तेरे सहयोग में,
मैं जीवन की हर मुसीबत का सामना करती हूँ ।

-डॉ० रीना कुमारी

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