लघु कथा || पियूष गोयल

एक मध्यवर्गीय सेठ जी अपनी दुकान पर जा रहे थे। रास्ते में सड़क पर पड़े कागज़ को सेठ जी ने पता नहीं क्या सोचकर उठा लिया। सेठ जी ने कागज़ पढ़ा।

सेठ जी दंग रह गए। एकदम वापस घर आए और सिर्फ़ अपनी पत्नी को बताकर चल दिए।

उस कागज़ पर लिखा था, “अभी तुरंत खाटू श्याम जाना है, और वहाँ पर जब मंदिर की ओर जा रहे होगे, तुमसे एक बुज़ुर्ग टकराएगा।

तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हें अपने साथ ले जाएगा। मना मत करना, उसके साथ चले जाना। आगे सब ठीक होगा।”

सेठ जी पहुँच गए। वैसा ही हुआ, जो कागज़ में लिखा था।

सेठ जी जब बाबा के दर्शन के लिए जा रहे थे, एक बुज़ुर्ग उनसे टकराया और वह बुज़ुर्ग सेठ जी का हाथ पकड़कर अपनी झोंपड़ी में ले गया।

झोंपड़ी की दशा देखकर सेठ जी का मन बहुत दुखी हुआ। बुज़ुर्ग अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे।

बुज़ुर्ग ने अपनी दर्द भरी कहानी सुनानी शुरू की और सेठ जी को पैसों से भरे दो सूटकेस दे दिए।

रोते हुए कहने लगे, “मैंने अपनी ज़िंदगी में पाप का पैसा कमाया। हमारा सब कुछ ख़त्म हो गया। आज हमारी यह दुर्दशा तुम देख ही रहे हो। सिर्फ़ ये पैसे बचे हैं, जो मैं तुमको देना चाहता हूँ। अब मैं प्रायश्चित करना चाहता हूँ।”

सेठ जी एकदम सकते में आ गए। क्या करूँ? कागज़ में जो लिखा था, सब सच हो रहा था।

सेठ जी ने यह बात सिर्फ़ अपने बड़े बेटे व पत्नी को बताई और खाटू श्याम बुला लिया।

सेठ जी ने भी ईमानदारी का परिचय दिया।

उन पैसों से एक सुंदर धर्मशाला बनवाई। उन बुज़ुर्ग दम्पत्ति को धर्मशाला में रहने को बुला लिया। सेठ जी भी अपनी पत्नी के साथ धर्मशाला में ही रहने लगे।

उसी पैसे से कई जगह प्याऊ बनवाई, एक गौशाला का निर्माण करवाया, एक प्राइमरी स्कूल का निर्माण करवाया।

बुज़ुर्ग दम्पत्ति सेठ जी से बोले, “बेटा… तुम बहुत अच्छे हो। तुमने सब काम कर दिया। तुम अब यहीं हमारे साथ मेरे बेटे की तरह रहना।

लेकिन बेटा, ये बताओ। मैं इतने सारे लोगों से टकराया, पर कोई भी मेरे साथ चलने को तैयार नहीं हुआ। फिर तुम कैसे मेरे साथ मेरी झोंपड़ी तक आए और मेरी सब बात सुनी, और इतने आसानी से ये सब काम कर दिए, जो मैं अपनी ज़िंदगी में करना चाहता था।”

सेठ जी की आँखों में आँसू आ गए और बुज़ुर्ग का हाथ पकड़कर सब कुछ बता दिया उस कागज़ के बारे में।

ये सब सुनते-सुनते बुज़ुर्ग, सेठ जी से गले लगकर बहुत रोए।

जो भी वहाँ था, सबकी आँखों में आँसू थे।

बुज़ुर्ग दम्पत्ति सेठ जी से बोले, “बेटा, एक काम और करना। हर साल ५ गरीब बिटियों की शादी भी करते रहना।”

सेठ जी ने हामी भर दी।

जय खाटूश्याम बाबा। तेरी महिमा तू ही जाने। तू कब क्या कर दे, कुछ नहीं पता। बुज़ुर्ग कहीं के, सेठ जी कहीं के। कैसे एक कागज़ ने सब कुछ कर दिया।

तेरी महिमा अपरम्पार। जय बाबा खाटूश्याम। हारे का सहारा बाबा खाटूश्याम हमारा।

– पियूष गोयल

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