सुविचार (देशभक्ति)
1 –
सीना तान कर खड़ा है ओ नौजवान,
मेरे देश की तुम हो वीर संतान
मिटा दे दुश्मन के सारे नामोनिशान
ओ भारत के सैनिक, तुम हो मेरे देश की पहचान।
2 –
ख़बर है कि वो रात-दिन मेहनत करता है।
मेरे देश की सीमा पर तैनात योद्धा सा लड़ता है।
जंग छिड़ी है तो जीत कर ही आएगा,
दुश्मन को उसकी औकात से रूबरू कराएगा।
3 –
भगत सिंह सा हो बचपन,
सुभाष चन्द्र सी जवानी चाहिए।
नशों में दौड़ता रहे, देश प्रेम का लहू।
मुझे वो मर्दानी सी लक्ष्मीबाई चाहिए।
कविता
(चलों एक बार फिर भारत को आजादी दिलाते हैं।)
चलों एक बार फिर भारत को आजादी दिलाते हैं,
पहलगाम में हुये हमले से अब जाग जाते हैं।
फिर ना चढ़े कोई मासूम बिन मौत की बलि,
उस कातिल दुश्मन को मार भगाते हैं।
पुलवामा का वो हमला मेरी आंखों को नम करता है,
मेरे अंदर की रूह को रोने पर मजबूर करता है।
मेरे देश का वो वीर- नौजवान,
निडर सरहद पर दिन-रात लड़ता है।
हमें फिर से क्रांति की ज्वाला जलानी होगी।
वीर स्वतंत्रता सेनानियों की अमर कहानी होगी।
हमें एक बार फिर आजादी की चिंगारी जलानी होगी।
हुकूमत की है ना जाने कितने विदेशी शासकों ने,
फिर से कोई शासक हुकूमत ना कर पाए,
मेरी भारत की जनता को और ना सताए,
मेरे देश की सीमा पर कदम ना बढ़ाएं।
चलों एक बार फिर भारत को आजादी दिलाते हैं,
पन्द्रह अगस्त का दिन फिर से ख़ास बनाते हैं।
सपनों का वो अखंड भारत,
ओ देश के वीर नौजवानों, चलों फिर बनाते हैं।
शायरी
1 –
भगत सिंह और सुभाष चन्द्र की वीर कहानी देखी।
अमर सपूतों की मिटती जवानी देखी।
2 –
मिटते नहीं किसी के मिटाने से,
झुकते नहीं किसी के झुकाने से।
मेरे देश का सिपाही कमजोर नहीं होता,
मेरे देश का सिपाही अंतिम सांस तक हिम्मत नहीं खोता।
3 –
तक़दीर लिखी अपनी, एक कहानी लिखूंगी।
देश के वीर सपूतों की जवानी लिखूंगी।
मर गए जो मेरे देश की सेवा में लड़ते-लड़ते,
ये आख़िरी शब्दों में वीर सपूतों की बलिदानी लिखूंगी।।
–आकांक्षा प्रजापति
महोबा ( उत्तर प्रदेश )
सराहनीय भावाभिव्यक्ति