छोटा सा बचपन, बड़ी-बड़ी बात,
तेरे संग बीती हर इक रात।
झगड़े भी हुए, पर प्यार भी था,
तेरी हँसी में मेरा संसार भी था।
राखी की डोरी, वो मिठास भरे दिन,
तेरे बिना अधूरा मेरा जीवन-संगीन।
साथ चला जब तू मेरे संग राहों में,
डर भी लगे जैसे मज़ाक़ों की बाहों में।
– सौरभ सिंह चौहान