1-
आज हमने उसके सामने अपनी जुल्फे सवाँरी थी,
खास बात है ये कि , वो शाम भी कुवारी थी।
इक नजर ने हमारी सादगी की नजर उतारी थी,
हमें यकीन है कि वो इक नजर तुम्हारी थी।
2 –
चोटी न बनी बिखरे रह गए बाल मेरे,
संभलते – संभलते बिगड़ गए हाल मेरे।
और तू हर दर्द में कैसे मुस्कुरा लेती थी मां,
रोते – रोते गुजर गए हर साल मेरे।
3 –
आईना दो तो तस्वीर उतार दूं,
मिर्च दो तो नजर उतरा दूं।
लोग तुम्हें हाव – भाव से जानते हैं,
हमें मौका दो तुम्हें, अपनी ग़ज़ल में उतार दूं।
रागिनी