1-
एक शख्स क्या गया, की पूरा काफिला गया,
तूफ़ा था तेज, पेड़ को जड़ से हिला गया।
जब सल्तनत से दिल की ही रानी चली गई,
फिर क्या मलाल तख्त गया या किला गया।।
2-
पत्थर की चमक है न नगीने की चमक है,
चेहरे पे सीना तान के जीने की चमक है।
पुरखों से विरासत मे हमें कुछ न मिला था,
जो दिख रही है खून पसीने की चमक है।।
3-
जंगल जो जलाए थे उनमे बस्तियां भी थी,
काँटो के साथ फ़ूल पे कुछ तितलियाँ भी थी।
तुमने तो गला घोंट दिया तुमको को क्या एहसास,
इसमे किसी के नाम की कुछ हिचकियां भी थी ।।
4-
किस्मत में कोई रंग क्या धानी भी लिखा है,
बस हरफ ही लिखे हैं, या मानी भी लिखा है।
सूखी जुबान जिंदगी से पूछने लगी बस,
प्यास भी लिखी है की पानी ही लिखा है।।
5 –
मुश्किल थी सम्भालना ही पड़ा घर के वास्ते,
फिर घर से निकालना ही पड़ा घर के वास्ते।
मजबूरीयों का नाम हमने शौक रख दिया,
हर शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते ।।
6-
मुझको नया रोकिए, ना ये नजराने दीजिए,
मेरा सफ़र अलग है मुझे जाने दीजिए।
ज्यादा से ज्यादा होगा ये की हार जाएंगे,
किस्मत तो हमें अपनी आजमाने दीजिए।।
7 –
जिस रास्ते पे चल रहे उस पर हैं छल पड़े,
कुछ देर के लिए मेरे माथे पर बल पड़े।
हम सोचने लगे की यार लौट चलें क्या,
फिर सोचा यार चल पड़े तो चल पड़े।।
8-
मुश्किल थी सम्हालना ही पड़ा घर के वास्ते,
फिर घर से निकालना ही पड़ा घर के वास्ते।
मजबूरीयों का नाम हमने शौक रख दिया,
हर शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते।।
9 –
आँखों से मेरे नींद की आहट चली गयी,
वो घर से गया घर की सजावट चली गयी।
इतनी हुई खता की लब को लब से छू लिया,
इन शहद से होंठो की तरावट चली गयी।।
10 –
जब डर पता चला तभी ताकत पता चली,
सीने में आग सीने की हिम्मत पता चली।
शर्तो पे तेरी बिकने से इन्कार कर दिया,
जब जाके अपने आप की कीमत पता चली।।
11 –
काँटे बना रहे कोई गुल बना रहे,
कुछ लोग कही काक को बुलबुल बना रहे।
तुम रास्तों को खाई में तब्दील कर रहे,
हम लोग उन्ही खाइयों पे पूल बना रहे।।
12-
कल भोर की चिंता में नींद न आनी,
रावण नही है मारना, रोटी है कमानी
हम राम तो नही, मगर यह बात भी सच है,
हर आदमी की होती है एक राम कहानी।
13-
किस्मत की बाजियों पर इख्तियार नहीं है,
सब कुछ है जिंदगी मे मगर प्यार नहीं है।
कोई था जिसको यार करके गा रहे हैं हम,
आँखों में किसी का अब इंतजार नहीं है।।