शब्दों के शिल्पी : भगवंत अनमोल
साहित्यकार वह होता है जिसकी लेखनी केवल काग़ज़ पर स्याही नहीं बिखेरती, बल्कि समाज की आत्मा को छूती है, उसके दुख-दर्द को आवाज़ देती है और भविष्य के लिए एक उज्जवल राह दिखाती है। ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व के धनी हैं ” भगवंत अनमोल ” जिनकी कलम आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत है।
भगवंत अनमोल साहित्य अकादमी 2022 इसी संकल्प की गूँज है। यह केवल एक अकादमी नहीं, बल्कि साहित्यकारों और रचनाकारों के लिए सम्मान, प्रेरणा और नई उड़ान का मंच है। यहाँ शब्द केवल पढ़े नहीं जाते, बल्कि जिए जाते हैं। और लेखनी केवल भावों का नहीं, बल्कि समाज की आत्मा का आईना बनती है।
👉 उनकी पुस्तकों ने साहित्य-जगत में अद्भुत छाप छोड़ी है।
• “बाली उमर” युवाओं के सपनों, संघर्षों और भावनाओं की ऐसी गाथा है, जो हर पाठक को अपनी ही यात्रा का प्रतिबिंब दिखाती है। यह कृति बताती है कि युवा उम्र केवल मौज का समय नहीं, बल्कि संकल्प और साधना की पहली सीढ़ी है।
• “जिंदगी 50–50” जीवन की वास्तविकता का आईना है। इसमें आधा संघर्ष, आधा विश्वास, आधा दर्द और आधा सुख है। यह रचना पाठकों को यह सिखाती है कि जीवन चाहे जैसा हो, जीने का जज़्बा ही सबसे बड़ा हौसला है।
• “प्रमेय” में विचारों की गहराई है, तर्क और संवेदना का अद्भुत संगम है। यह पुस्तक यह संदेश देती है कि जीवन का हर प्रश्न अपने भीतर ही उत्तर लिए होता है, बस दृष्टि साफ़ होनी चाहिए।
• “गेरबाज” समाज के उस हिस्से की आवाज़ है, जिसे अक्सर अनसुना कर दिया जाता है। यह रचना बताती है कि साहित्य तभी पूर्ण है, जब वह समाज के हर वर्ग, हर पीड़ा और हर सच्चाई को अपने भीतर समेट ले।
इसी कड़ी में, अभय प्रताप सिंह की पुस्तक “भ्रमण और ब्रह्मांड”, जो भगवंत अनमोल के अनुग्रह से प्रकाशित हुई, साहित्यिक यात्रा का एक और गौरवशाली पड़ाव है। यह पुस्तक विचार और भाव दोनों का ऐसा संगम है, जिसमें जीवन की गहराई और ब्रह्मांड की व्यापकता का अद्भुत समन्वय मिलता है।
अनमोल जी का व्यक्तित्व गहरी संवेदनाओं, सादगी और स्पष्टता से परिपूर्ण है। वे केवल लेखक नहीं, बल्कि एक विचारक, एक समाज-चिंतक और जन-जन की भावनाओं के सच्चे प्रतिनिधि हैं। उनकी रचनाओं में हमें मानवीय रिश्तों की ऊष्मा, समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध और जीवन की गहराई से जुड़ा सत्य दिखाई देता है।
उनकी कलम की सबसे बड़ी ताकत है ” सत्य को साहस के साथ प्रस्तुत करना “। वे मानते हैं कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनके शब्द अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं, वे असमानताओं को चुनौती देते हैं और हर उस आवाज़ को स्वर देते हैं, जिसे अक्सर अनसुना कर दिया जाता है।
भगवंत अनमोल के भाव सरल हैं, लेकिन उनमें असाधारण गहराई है। वे जटिल विचारों को भी सहज भाषा में इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि पाठक का हृदय उनसे जुड़ जाता है। उनका स्वभाव विनम्रता से भरा हुआ है, परंतु उनकी सोच में अपार दृढ़ता और संकल्प है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं।
आज के समय में, जब साहित्य अक्सर व्यावसायिकता की ओर झुक रहा है, तब भगवंत अनमोल जैसे रचनाकार हमें यह याद दिलाते हैं कि ” साहित्य की असली शक्ति समाज को बदलने में है। ” उनका जीवन और लेखन यह संदेश देता है कि यदि कलम सच्चाई और संवेदना से भरी हो, तो वह लाखों दिलों में आशा का दीप जला सकती है।
लेखनशाला की ओर से, हम उन्हें एक प्रेरणास्तंभ मानते हैं। उनके व्यक्तित्व से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा लेखक वही है, जो अपनी लेखनी से समय को आईना दिखाए और आने वाली पीढ़ियों को राह दे।
” भगवंत अनमोल – एक नाम नहीं, बल्कि साहित्य और समाज के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। ”
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 2
भगवंत अनमोल
साहित्यकार ( कानपुर )