इश्क को निकाला जा रहा है।
जिस्म को खंगाला जा रहा है।।
उसकी आंखों से मोहब्बत है
बहम को पाला जा रहा है।।
दिल में तुम्हारे सिवा कोई नहीं
इश्क धोखे में डाला जा रहा है।।
वो कौन लड़की नहीं जानता
संदेह को संभाला जा रहा है।।
कहो किसी और के हो गए हो
चरित्र को उछाला जा रहा है।।
विक्रम विद्रोही