युवा समाज सेवक रत्नाकर सिंह : सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या ऊँचे दर्जे की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि ज़रूरी होती है निस्वार्थ भावना और सेवा का जज़्बा। रत्नाकर सिंह इस सत्य के जीवंत उदाहरण हैं। युवावस्था में ही उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य समाज सेवा को बना लिया और यही उन्हें दूसरों से अलग पहचान दिलाता है।
रत्नाकर सिंह का मानना है कि सेवा किसी अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका होना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में उनका सक्रिय योगदान, युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे जिस भी कार्य को हाथ में लेते हैं, उसमें केवल परिणाम नहीं बल्कि सकारात्मक बदलाव उनकी प्राथमिकता होती है।
लेखनशाला के लिए गर्व की बात है कि समाज में ऐसे युवा सेवक मौजूद हैं, जो बिना किसी दिखावे के, बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। रत्नाकर सिंह का सहज स्वभाव, करुणा और सहयोग भावना ही उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच प्रिय और सम्मानित बनाती है।
रत्नाकर सिंह हमें यह सिखाते हैं कि समाज की असली ताक़त उसकी एकता और सेवा-भाव में है। अगर हर युवा उनके जैसे सोच ले, तो निश्चित ही एक बेहतर, मजबूत और संवेदनशील भारत का निर्माण होगा। लेखनशाला उनकी सेवाभावना को नमन करती है और सभी युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करती है।
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 10
रत्नाकर सिंह ( समाजसेवक )
लालगंज रायबरेली