“इसे इश्क कहें या कुछ और – अवधेश सिंह राठी की किताब से विचार | शब्दांजलि”

1 –
बात कुछ उन अतीत के लम्हों की है जो सदैव गहरे छाप छोड़ गई है, जो केवल मेरे दिल में थी अब वो आप सभी के बीच में है।

2 –
मेरी ज़िंदगी में कभी भी इतनी खुशी नहीं मिली थी लोगों ने ताने, दर्द, और गम दिया था किसी ने प्रोत्साहित नहीं किया था।

3 –
उसने कहा कि मुझे भविष्य में प्रोफेसर बनना है, मैंने कहा मुझे तो नहीं पता लेकिन मुझे बहुत बड़ा ज्ञानी बनना है, मुझे पढ़ाई सबसे अंतिम तक करना है।

4 –
लेकिन मैं ग़रीब परिवार से होने की वजह से संघर्ष इतना ज़्यादा था कि किसी तरह से मां – बाप पढ़ा रहे थे तो मेरे मन में हमेशा यही था कि कल का कामयाब नहीं हुए तो दुनिया हमारी टैलेंट को पहचान नहीं पाएगी और ताने मारेगी।

5 –
दुनिया की यही सच्चाई है हमारे यहां लड़कों से कोई सवाल नहीं किया जाता है और लड़कियों से खूब सारे सवाल किए जाते हैं, किसका कॉल था, कौन था, उसको कैसे जानती हो, ऐसे बहुत सारे सवालों का जन्म हो जाता है। बिहार एक ऐसी जगह है जहां लड़के का फ़ोन किसी लड़की के नंबर पर आ जाए तो बहुत बड़ी बात होती है।

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स्रोत…
पुस्तक ~ इसे इश्क कहें या कुछ और
लेखक ~ अवधेश सिंह राठी
प्रकाशन – रेड लीफ बुक्स
पृष्ठ संख्या – 11, 17, 43, 59, 70

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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