“शब्दांजलि – डार्क हॉर्स से सीखें संघर्ष, सोच और सफलता | Lekhanshala”

1-
विश्विद्यालय जाने वाली मेट्रो आ गई, दरवाज़ा खुलते ही कोई तीन चार व्यक्ति नीचे उतरे और लगभग दो ढाई सौ लोग उस पर सवार हो गए।

2 –
संतोष के लिए सोचना लाजमी था कि जब खाना ऐसा गंध कर रहा है तो बाथरूम की दशा क्या होगी।

3-
संतोष तो बस आँख गोल किए एकटक रायसहब को देखे और निर्बाध सुने जा रहा था। उसने सोचा भी नहीं था कि इतनी छोटी – सी बात इतिहास की गलती दोहराने वाली बात हो सकती थी।

4 –
आप कैसा गीत सुनते हैं! कैसे गानों का रिंगटोन रखते हैं! मोबाइल का वॉलपेपर कैसा है! इन सब चीज़ों से भी लोग आपके व्यक्तित्व का मूल्यांकन करते हैं। सो, इन चीजों के चयन में आपको सावधानी बरतनी चाहिए।

5 –
संतोष ने तुरंत फोन को वाइब्रेशन मोड में डाल दिया। संतोष का मन रायसहब की बौद्धिकता को सलाम करना चाह रहा था। उसने सोचा कि सुबह सही ही कहा था मैने कि अब आपके शरण में आ गया हूं। वह सोच रहा था कि ऐसे आदमी की संगत में आईएएस – आईपीएस बनना बहुत दूर नहीं।

 

 

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स्रोत…
पुस्तक ~ डार्क हॉर्स
लेखक – नीलोत्पल मृणाल
प्रकाशन – हिन्द युग्म
पृष्ठ संख्या – 18, 22, 24, 25, 26

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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