पूरे विंदा निवासी ” विजय प्रताप सिंह ” जी का संघर्ष केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता की परीक्षा है। जब हालात ऐसे बने कि उम्मीदें कमजोर पड़ने लगीं और परिवार टूटने की कगार पर पहुँच गया, तब एक मदद का हांथ देवदूत बनकर सामने आया। यह मदद का हांथ था ” CRPF जवान एवं समाजसेवक संदीप सिंह परिहार जी का “, जिन्होंने यह साबित किया कि जवान की ड्यूटी कभी खत्म नहीं होती।
हम जवानों की छवि अक्सर सीमा पर खड़े वीर सपूतों की देखते हैं, जो वर्दी पहनकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं। लेकिन संदीप सिंह परिहार ने यह सच्चाई सामने रखी कि जवान केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि हर जगह और हर परिस्थिति में ड्यूटी पर रहते हैं। विजय प्रताप सिंह जी की इस कठिन घड़ी में उन्होंने जिस करुणा और तत्परता से कदम बढ़ाया, उसने यह एहसास कराया कि सिपाही का कर्तव्य केवल देश की सरहदों की सुरक्षा करना ही नहीं, बल्कि समाज की आत्मा को भी संभालना है।
कल्पना कीजिए…
अस्पताल का ठंडा कमरा, मशीनों की आवाज़ें, परिवार की आँखों से बहते आँसू और हर पल टूटती उम्मीदें। ऐसे में जब चारों ओर सन्नाटा हो, तब एक सिपाही अपनी छुट्टियों में भी चैन से नहीं बैठता। वह बिना किसी दिखावे के मदद का हाथ बढ़ाता है और यह संदेश देता है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। यही तस्वीर संदीप सिंह परिहार की है। एक जवान, जो हर जगह ड्यूटी पर है।
उनका शांत स्वभाव, साफ़ दिल और करुणा यह सिखाती है कि सिपाही की असली ताक़त केवल हथियार नहीं, बल्कि उसकी आत्मा में बसी इंसानियत है। वर्दी उसकी पहचान ज़रूर है, पर उसकी आत्मा का धर्म सेवा है। विजय प्रताप सिंह जी की इस लड़ाई में उनका योगदान केवल एक परिवार की मदद नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोरने वाला उदाहरण है।
लेखनशाला संस्था संदीप सिंह परिहार को नमन करती है। उनके इस योगदान ने हमें यह सिखाया है कि जवान की ड्यूटी सीमा पर शुरू होकर कभी खत्म नहीं होती। वह समाज की हर गली, हर मोड़ और हर दिल में जारी रहती है। ” संदीप सिंह परिहार ” केवल CRPF जवान ही नहीं, बल्कि इंसानियत के सच्चे प्रहरी हैं, जिनकी प्रेरणा हर दिल को छू लेने की ताक़त रखती है।
लेखनशाला अभिव्यक्ति – 6
संदीप सिंह परिवार ( भारतीय सेना )
लालगंज रायबरेली