जौन एलिया शायरी – सीरिज -1

अपने सब यार काम कर रहे हैं,

और हम हैं कि नाम कर रहे हैं।

 

अब तो हर बात याद रहती है,

ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया।

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ,

वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने।

उस गली ने ये सुन के सब्र किया,

उस गली ने ये सुन के सब्र किया।

एक ही तो हवस रही है हमें,

अपनी हालत तबाह की जाए।

क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में,

जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं।

 

 

कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई,

तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया।

 

काम की बात मैंने की ही नहीं,

ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं।

 

कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे,

जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे।

 

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं,

क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे।

 

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