“प्रेम आखेट: पूनम मनु की रचनाओं से जीवन और भावनाओं की शब्दांजलि | Lekhanshala”
1-
आप मत पूछिए क्या हम पे सफ़र में गुजरी
था लुटेरों का जहां गांव वहीं रात हुई।
2 –
‘ कुछ काम की बात पर ‘ वातावरण में राहत सी उतर आनी थी। पर विचित्र की कृतज्ञता और धन्यताबोध से भरा संजीव भावुक हो गया है। इस योग्य तो वो कभी था ही नहीं। एक झिझक है जो उसको अनौपचारिक होने से रोक रही है। शायद एक निर्धन और धनवान के बीच की खाई इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
3-
हमने अपनी मुफलिसी का इस तरह रक्खा भरम
वास्ते कम कर दिये, मग़रूर कहलाने लगे।
___
स्रोत…
पुस्तक ~ प्रेम आखेट
लेखिका – पूनम मनु
प्रकाशन – किताबघर
पृष्ठ संख्या – 9, 48, 51
नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पते पर संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
lekhanshala@gmail.com