“संघर्ष की जुबान: ‘द माइंड’ से चुनिंदा अंश जो हर युवा को सोचने पर मजबूर कर दें | शब्दांजलि”

1 –
अजीब सा समय आ गया है मेरे दोस्त,
पहचान भी बहुत है और पहचानता भी कोई नहीं।

2 –
अमीरी क्या होती है उसका सबक मैं जानता हूं,
गरीबी में भूखे रहने की तड़प मैं जानता हूं
आगे बढूंगा तो कांटे मिलेंगे मैं, डरता नहीं हूं
जिंदगी है तो संघर्ष है, मैं इनसे लड़ना जानता हूं।

3 –
पूरे गांव में छिन्न – भिन्न मची पड़ी थी तभी एक कोने से आवाज़ आती है कि अरे सुनते हो… उनके लड़कवा के नाम लिखिगा है अब वह स्कूल जाए…

4 –
पूरा विश्वविद्यालय सुरक्षा कर्मियों से लैश था और हर एक जगह उनको नई आंखों से देखा जा रहा था मानो कोई एलियन आ गया हो इंसानों के बीच में।

5 –
वार्डन – चल अब निकल ले यहां से और आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए, पता नहीं कहां से चले आते हैं…

6 –
भोला भईया अपनी रजिस्टर को लेकर और पूरे आत्मविश्वास के साथ वार्डन के कमरे में जय हिंद बोलते हुए प्रवेश लिए, हां थोड़ा डरे हुए भी थे क्योंकि वो आज पहली बार वार्डन का सामना करेंगे।

7-
तुम्हारा और मेरा यहां कोई संबंध नहीं रहेगा, यहां पर मैं तुम्हारा सीनियर हूं।

8 –
सुरक्षा कर्मी की नौकरी में भोला भईया को कोई भविष्य नहीं दिख रहा था और वो मेहनत करके पढ़ना चाह रहे थे जो कि नौकरी छोड़ने के बाद शायद इतना आसान न रहा।

9-
यार घर वाले साथ नहीं दिए नहीं तो मैं और कहीं होता।

10 –
तुम इतने समझदार और बड़े हो गए हो की अपना निर्णय खुद ले सको और घर वालों को ताना मारने की जगह खुद अपने आप करके आगे बढ़ सको।
___

स्रोत…
पुस्तक ~ द माइंड
लेखक ~ अभय प्रताप सिंह
प्रकाशन – बुक रिवर्स
पृष्ठ संख्या – 3, 7, 16, 29, 31, 33, 34, 40, 45

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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