1 –
लिख रहा था मैं, वो कलम भी रो रहा था,
गुमनाम आँखें देख, ये मन भी रो रहा था।
उन बच्चों ने तो, अपनी मां को खोया था,
पर, उस मंज़र को देख, हर व्यक्ति रो रहा था।
2 –
गांव से शहर, शहर से गांव में सिमट गए हैं,
उन्होंने समझा नहीं, दो दिल फ़िर बिछड़ गए हैं।
3 –
मैं अभी बच्चा हूं, मुझे बच्चा बना रहने दो,
बड़ा बनकर मुझे, तकलीफों से लड़ना नहीं आएगा।
4 –
दो जिस्म एक जान कहते हैं लोग,
तुम्हारी यारी को सलाम करते हैं लोग।
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स्रोत…
पुस्तक ~ थोड़ी देर बाद ( अजनबी )
लेखक ~ अभय प्रताप सिंह
प्रकाशन – अद्विक पब्लिकेशन
पृष्ठ संख्या – 26, 51, 62, 79
नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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