1 –
मां तुम कैसे जी लेती हो
_______
माँ तुम कैसे जी लेती हो
सारे दुःख दर्द पी लेती हो
हम सब तुमको रोज़ रुलाते
फिर क्यों तुम हमें माफ करती हो
माँ तुम कैसे जी लेती हो ….2
जब हम हरपल खुश हैं रहते
तो फिर तुम क्यों रोती रहती हो
हमको सुखा बिस्तर देकर
तुम गीले में क्यों सोती हो
माँ तुम कैसे जी लेती हो…. 2
रोज़ रुलाया रोज़ सताया
प्रेम शब्द को हमने भुलाया
भरपेट भोजन हमको खिलाती
पर माँ तुम क्यों भूखी सोती हो
माँ तुम कैसे जी लेती हो ..2
हम सब को तुमने समझाया
प्यार किया पर तुमने न जताया
मां होने का फ़र्ज़ निभाया
इतना सब कुछ कर लेती हो
मां तुम कैसे जी लेती हो…2
सारे दुःख दर्द पी लेती हो
माँ तुम कैसे जी लेती हो।
2 –
एक विद्यार्थी को ये भी पता होना चाहिए कि मुझे मेरे क्लास का कैसा माहौल बनाना है।
3 –
मैं बहुत सारे बच्चे ऐसे भी देखा हूं जो अपने बारे में तब नहीं सोचते हैं जब वो पढ़ाई कर रहे होते हैं, वो तब सोचते हैं जब वो पढ़ाई कर चुके होते हैं।
4 –
ज़्यादा से ज़्यादा सकारात्मक नजरिए का प्रयोग करें न कि नकारात्मक।
5 –
ये बात सही है कि आप सभी की ताकत और कमजोरी अलग – अलग होगी, इसलिए सिर्फ़ अपने ही ताकत और कमजोरी को पहचानिए न कि दूसरे की। क्योंकि दूसरे की ताकत और कमजोरी आपके ताकत और कमजोरी से बिल्कुल विपरीत होता है।
___
स्रोत…
पुस्तक ~ कहानी हर विद्यार्थी की
लेखक ~ अभय प्रताप सिंह
प्रकाशन – बुक रिवर्स
पृष्ठ संख्या – 14, 17, 19, 26
नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
lekhanshala@gmail.com