।। तेरे साथ एक शाम ।।
यूं तो हम दोनों करीब करीब रहते हैं…
मुलाकात तो रोज होती है…
घंटों देर तक बातें होती हैं…
कभी सामने से, कभी मोबाइल द्वारा…
एक दिन हम दोनों ने तय किया…
साथ साथ शाम बिताएंगे…
चुपके चुपके अलग अलग घर से निकले…
साथ साथ पहले सिनेमा देखा…
साथ खाना खाने गए…
फिर शाम झू गये…
सूरज को डूबता हुआ देखा…
और चांद को चढ़ते हुए देखा…
झू के समंदर में चांद की चांदनी से सज रही थी…
दोनों हाथों में एक दूसरे का हाथ लिए…
चांदनी रात का मजा ले रहे थे…
बड़ी हसीन शाम थी…
तेरे साथ जो बिताई थी…
याद रहेगी यह शाम सदा के लिए…!
अच्युत उमर्जी