“अभय प्रताप सिंह सहित समकालीन कवियों की ‘सिलवटें’ में झलकती संवेदनाएं”

1 –
साथ की उम्मीद नहीं क्या पता क्या होगा ?
सफ़ल हुए तो तारीफ़, वर्ना इंतज़ार होगा।

ये प्यार, परिवार, दोस्त, एक तन भी न होगा,
कुछ लकड़ी, कण, आग़, बस कफ़न होगा।

इन स्वार्थ से भरे रिश्तों से भी मैं छूट जाऊंगा,
बस एक इशारा होगा, मैं दफ़न हो जाऊंगा।
– अभय प्रताप सिंह

2 –
ये कलेक्टर तो बशर्ते एक बहाना होगा,
असली मकसद तो मां के हाथ का बना खाना होगा।
– अभय प्रताप सिंह

3 –
भरोसा भी था मुझे, और लोग मुझसे जुड़ते चले गए,
देखते ही देखते इस परिवार में हज़ारों लोग हो गए।
– अखिलेश पांडेय

4 –
पता नहीं कौन सा नशा था यार उन चार दीवारों में,
आज अपने घर को भी मैं पुस्तकालय बना डाला।
– अवधेश सिंह राठी

5-
हम….
प्यारी प्यारी प्यारी राज दुलारी
सबसे है प्यारी बिटिया हमारी
प्यारी प्यारी प्यारी राज कुमारी
सबसे है न्यारी बिटिया हमारी
झूमता है मेरा ये मन
झूमो नाचो गाओ मगन।
– अंकुर तिवारी

6 –
धन नहीं आभूषण नहीं, प्यार चाहिए
आश्वासन मांगता कलाई का यह बंधन।
– डॉ. विनीत विधार्थी

7-
लेबर लेबर चिल्लाते हैं,
फ़िर एक कागज़ साइन कराते हैं।
क्या कहते हो मज़दूर दिवस,
क्यों नहीं कहते हो मजबूर दिवस।
– प्रदीप प्यारे

8 –
ये दोनों जान है मेरी मुझे न कोई उलझन है,
सजी है शायरी इनसे कि जैसे कोई दुल्हन है।
मैं कोई भी फरक करता नहीं इनसे मुहब्बत में,
है उर्दू दिल जो मेरा तो ये हिंदी मेरी धड़कन है।
– ज़मीर अंसारी

9-
गर खामोशियां ही सब कुछ बोल देती,
तो शब्दों की क्या जरूरत…
– अर्चना होता

10 –
आओ हम एक कदम बढ़ाएं
नकारात्मकता को दूर भगाएं
‘ न ‘ को जीवन से कहें नमस्ते,
सकारात्मकता को अपनाएं।
– आशा झा ‘ सखी ‘
___

स्रोत…
पुस्तक ~ सिलवटें ( साझा काव्यसंग्रह )
लेखक ~ अभय प्रताप सिंह
प्रकाशन – प्राची डिजिटल पब्लिकेशन
पृष्ठ संख्या – 10, 12, 14, 16, 18, 22, 24, 31, 48, 50

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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