“ट्वेल्थ फेल – अनुराग पाठक जी द्वारा लिखित सत्यता पर आधारित प्रेरणादायक कहानी और जीवन संघर्ष”

1 –
अंत में उसने चेकर से निवेदन भी किया कि उसकी दादी का स्वास्थ्य ख़राब होने के कारण वह ठीक से पढ़ाई नहीं कर सका था, इसलिए यदि उसे पास कर दिया जाए तो वह हमेशा उनका अहसान मानेगा।

2 – मनोज तू अपनी औकात में रहकर बात कर, डिप्टी कलेक्टर तो बहुत बड़ी बात है तू तो क्लर्क भी नहीं बन सकता। ट्वेल्थ पास कर नहीं पाए तुम, चले डिप्टी कलेक्टर बनने। आदमी को उतने बड़े सपने ही देखने चाहिए, जितनी उसकी हैसियत हो।

3 –
विष्णु जे भैंस भी लगातार अभ्यास से अपने घर पहुंचने को रास्ता पहचानना सीख गई। जानवर भी लगातार एक ही काम करते – करते सीख जात हैं, हम तो फ़िर भी आदमी हैं। आदमी के लिए कुछ भी कठिन काम न है, करत – करत अभ्यास से जड़मती होत सुजान, रसरी आवत – जात ते सिल पर होत निशान। राकेश ने एक आक्रामक विराम के बाद अपने मन में बहुत देर से रुकी हुई बात बचपन में पढ़े दोहे के माध्यम से कही।

4 –
बेंच पर बैठे – बैठे उसने विचार किया कि ऐसी तकलीफें तो आएंगी ही। इन्हीं कठिनाइयों को तो पार करना है। इस विपरीत समय में भी मुझे धैर्य नहीं खोना है। मुझे पढ़ाई करनी ही है चाहे कुछ हो जाए। अचानक उसने अपने भीतर हिम्मत महसूस की। वह उठा और तेज कदमों से क्लास की ओर चल पड़ा। उसके बाद उसने लगातार तीन क्लास अटेंड की। उसने तय किया कि वह किसी के सामने रोएगा नहीं, गिड़गिड़ाएगा नहीं। किसी दोस्त से मदद नहीं मांगेगा। उसे लग रहा था कि इसी संघर्ष के रास्ते पर चलकर वह अपने जीवन में कुछ करने लायक बन पाएगा। उसे अब इस संघर्ष में अजीब सी संतुष्टि होने लगी थी।

5 –
आपका रास्ता एकदम सही है पापा, आप सच्चाई की लड़ाई लड़ रहे हैं। आपको दबाना ज्वालामुखी को दबाना है। ” विवेकानंद केन्द्र में सिखाई गई ईमानदारी और देशभक्ति की शिक्षा के सांचे में उसे अपने पिता एकदम फिट बैठे हुए दिखाई दे रहे थे। ”

6 –
मैं खुद को कितना होशियार मानता था, पर आज समझ आ गया कि मैं कितना अयोग्य हूं। मुझे कोई हक नहीं है इतने बड़े सपने देखने का। मैं व्यर्थ ही दीप सर के बराबर अपने आपको मान रहा था। जब मैं सौ रुपए का ट्यूशन नहीं पढ़ा सकता तो पीसीएस में क्या ख़ाक़ सफ़ल होऊंगा।

7 –
आदमी यदि टाइम का सही मैनेजमेंट कर ले, तो समय की कमी नहीं रहती।

8 –
गुप्ता ने मनोज के जोश की हवा निकालते हुए कहा – ” एमपी पीएससी की प्रीलिम्स कभी क्लियर नहीं हुई, चले सिविल सर्विस परीक्षा क्लियर करने, हुंह! बड़े आये युद्ध लड़ने वाले, दिन में सपना देखना छोड़ दो मनोज। आईएएस, आईपीएस हम जैसे गांव के सरकारी हिंदी मीडियम के लड़कों के लिए नहीं है। एमएलबी कॉलेज से कितने बने है आज तक आईएएस आईपीएस ? जीरो। आईआईटी दिल्ली, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जैसी जगह से निकलते हैं आईएएस आईपीएस। ”

9 –
टेस्ट हो गया। टेस्ट के अगले दिन विकास सर ने क्लास में पूछा – ” मनोज शर्मा कौन है ? मनोज ने अपना हाथ उठाया।
विकास सर ने कहा – ” इस बच्चे में सिविल सर्विस एग्जाम क्लियर करने की क्षमता है, टेस्ट में इसके सबसे ज़्यादा नंबर आए हैं। ”

10 –
मुख्य परीक्षा के लिए यह स्ट्रेटजी है कि अधिक से अधिक याद करो, अधिक से अधिक लिखकर देखो। परीक्षा के पुराने पेपर सॉल्व करो। बहुत सारे मॉक टेस्ट दो।
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स्रोत…
पुस्तक ~ ट्वेल्थ फेल
लेखक ~ अनुराग पाठक
प्रकाशन – neolit प्रकाशन
पृष्ठ संख्या – 16, 32, 34, 41, 52, 57, 73, 78, 83, 149

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। उन्हें कुछ बताना है, कुछ सिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पर पोस्ट हटाने हेतु संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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