“इंतज़ार: श्रीधर सिंह की लेखनी से संवेदनाओं की शब्दांजलि | Lekhanshala”
1-
आज मैं सोचता हूं कि शारीरिक विकलांगता कुरूपता परमात्मा की देन है। हमारा इनके बारे में गलत धारणा, गलत चिंतन, गलत व्यवहार करना किसी अपराध से कम नहीं है। ऐसा करने से समाज में अंधविश्वास का जन्म होता है।
2 –
जिम्मेदारियां कभी कम नहीं होती।
3-
मरने पर भी आप लोग मेरी कब्र सोना के पैरों के पास ऐसी बनाना कि मेरा सर उसके पैरों के पास हो।
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स्रोत…
पुस्तक ~ इंतज़ार
लेखक – श्रीधर सिंह
प्रकाशन – नोशन प्रेस पब्लिशिंग
पृष्ठ संख्या – 34, 41, 72
नोट –
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