“इंतज़ार: श्रीधर सिंह की लेखनी से संवेदनाओं की शब्दांजलि | Lekhanshala”

“इंतज़ार: श्रीधर सिंह की लेखनी से संवेदनाओं की शब्दांजलि | Lekhanshala”

1-
आज मैं सोचता हूं कि शारीरिक विकलांगता कुरूपता परमात्मा की देन है। हमारा इनके बारे में गलत धारणा, गलत चिंतन, गलत व्यवहार करना किसी अपराध से कम नहीं है। ऐसा करने से समाज में अंधविश्वास का जन्म होता है।

2 –
जिम्मेदारियां कभी कम नहीं होती।

3-
मरने पर भी आप लोग मेरी कब्र सोना के पैरों के पास ऐसी बनाना कि मेरा सर उसके पैरों के पास हो।

 

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स्रोत…
पुस्तक ~ इंतज़ार
लेखक – श्रीधर सिंह
प्रकाशन – नोशन प्रेस पब्लिशिंग
पृष्ठ संख्या – 34, 41, 72

नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पते पर संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
lekhanshala@gmail.com

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