“बाली उमर: भगवंत अनमोल की कहानियों से जीवन, भूख, प्रेम और राजनीति की झलक | Lekhanshala”
1-
वह इस बात से खुश हो रहा था कि ज्ञान पाने के लिए पढ़ना ज़रूरी नहीं है, उसके लिए दिमाग होना चाहिए। ठीक उसी तरह जिस तरह आजकल के कई नए लेखक सोचते हैं किताब लिखने के लिए पढ़ना ज़रूरी है।
2 –
जो सबसे बड़ा लठमार होता है, वही नेता बनता है अर्थात् जो हार कर भी अगली बार लड़ाई की तैयारी में लगा रहे वही नेता होता है।
3-
शादी सिर्फ दो लोगों की होती है पर उस शादी से ख़्वाब कई लोगों के जुड़े होते हैं।
4 –
गांव का कोई लड़का टूटी – फूटी अंग्रेज़ी बोल दे तो उसे गांव की आन – बान – शान मान लिया जाता था।
5 –
उसे पहली बार ‘ पागल है ‘ नाम सुनाई पड़ा था। उसे क्या पता था, यह सिर्फ़ शब्द ही नहीं, बल्कि आगे आने वाले कई वर्षों तक उसका नाम होने वाला था।
6 –
भूख का स्वाद से कोई लेना – देना नहीं होता। भूख तो जाने क्या – क्या खा जाती है, यह तो दाल रोटी ही थी। भूखा क्या न करता !
7 –
भारतीय राजनीति का पूरा असर इस मोहल्ले पर भी पड़ा था। खबरीलाल और पोस्टमैन ठीक उस सरकारी नौकरी की तरह हो गए थे जो बिना पैसे के ढेला भर भी काम नहीं करते थे।
8 –
एक बात तो है, दुनिया में आप कहीं भी रहो, हंसने और रोने का भाषा से कोई लेना – देना नहीं होता…
9 –
ऐसा माना जाता है कि दुनिया का क्रूरतम कोई राक्षस होता है पर दुनिया की सबसे क्रूर भूख और प्यास दो बहनें होती हैं।
10 –
आखिर प्रेम और धन का बहुत गहरा रिश्ता होता है।
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स्रोत…
पुस्तक ~ बाली उमर
लेखक – भगवंत अनमोल
प्रकाशन – राजपाल
पृष्ठ संख्या – 16, 18, 26, 31, 35, 36, 39, 44, 50, 53
नोट –
लेखनशाला संस्था की ‘शब्दांजलि’ का उद्देश्य आपकी पुस्तक की सहायता से उदास चेहरों पर खुशियों की एक छोटी सी झलक दिखाना है। यदि आपको लगता है कि आपकी पुस्तक का उपयोग करने में हमने कोई गलती की है, तो मैं आपसे व्यक्तिगत रूप से क्षमा चाहता हूं। आप हमें नीचे दिए गए ईमेल पते पर संदेश भेज सकते हैं और हमारी टीम आपकी पोस्ट को दो दिनों के अंदर हटा देगी। धन्यवाद।
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