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पिता जी, आप कितने महान हैं | शिवानी पाल
लेखनशाला की अनूठी पहल: पहली राष्ट्रीय साहित्य प्रतियोगिता का आगाज़
अकेलेपन को बयां करती कविता || Best poem for loneliness
परिवारिक कविता || poem for family
हे, गगन के सजग प्रहरी – अमर सिंह वर्मा
“शिवार्पण: सावन की प्रेमगाथा” | आलोक कौशिक
मैं ही वर्तमान हूँ | डॉ. मोहन तिवारी
कहकशा तेरी बातों का | डॉ. मोहन तिवारी
गांव, घर, खलिहान, परिपक्वता से भरी देवेंद्र की ” शर्वरी ” हिंदी कविता
आनंद |अच्युत उमर्जी
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